कौन देता है थल के बाजार को यूँ सीटी बजाने का हक?

आप ये लेख पढ़ें इससे पहले आपको आगाह करना चाहता हूँ की यह लेख ‘थल की बजारा’ के गीतकार व गायक पर किसी तरह का निजी प्रहार नहीं हैं। यह एक सवाल है हमारी सामंती व्यवस्था और सोच पर जिसे उत्तेजना नहीं अपितु समग्रता से देखने की जरूरत है।

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ननगेली ने हमें कहीं का नहीं छोड़ा!

शोषण और दमन का विरोध करने वालों की सूची बहुत लम्बी है। कैसी- कैसी परिस्थिति में लोग शोषण और दमन के खिलाफ क्या क्या कर गुज़रे ये सुन कर ही दिल दहल जाता है। ननगेली की कहानी अगर आप सुन लें तो शायद मनुष्य होने पर भी शर्म आने लगे।

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मुखौटों की हिल जातरा

हिल जातरा उत्तराखंड का पारम्परिक लोक नाट्य उत्सव है। इस उत्सव में कलाकार अलग अलग रंगों और आकारों के मुखौटे पहन कर अभिनय करते हुए अपनी भागीदारी दर्ज करते हैं। यह लेख इस मुखौटों की दुनिया को डिजिटल चित्रों में उकेरने का एक प्रयास है।

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उत्तराखंड की अवधारणा

एक पृथक राज्य के रूप में उत्तराखंड अब बीस बरस का हो चुका है। ऐसे में उत्तराखंड राज्य की विकास यात्रा का मूल्यांकन करना जरूरी है। पर वह करने से साथ-साथ यह भी जरूरी है की हम इसकी सामाजिक संरचना और उन सामाजिक-ऐतिहासिक कारकों की चर्चा करें जिसने राज्य के रूप में उत्तराखंड की अवधारणा की निर्मिति की।

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खेती का उत्सव – हिलजातरा

ग्रामीण जीवन में मनोरंजन की दॄष्टि से लोक नाट्यों का महत्वपूर्ण स्थान है। कुमाऊँ की सोर घाटी में आयोजित होने वाली हिलजातरा ऐसा ही एक लोकनाट्य है। खेतों में हाड़ तोड़ मेहनत से फसल की बुआई और उसके बाद कटाई से उपजा सुख लोक मनोरंजन के ऐसे तत्व है जो इस लोकनाट्य का संसार बुनते हैं।

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गमरा – भारत व नेपाल की साझी संस्कृति

गमरा उत्सव महाकाली नदी के दोनों ओर, कुमाऊँ और पश्चिमी नेपाल में, मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण लोक उत्सव है। गमरा में और प्रकॄति और मनुष्य के गहरे और आत्मीय रिश्तों की अभिव्यक्ति होती है। स्त्री केन्द्रित इस उत्सव में समूचा समाज गतिशील होकर एकता की अद्भुद बानगी पेश करता है।

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